लखनऊ (राघव): वरिष्ठ साहित्यकार और जाने-माने व्यंग्यकार गोपाल चतुर्वेदी का लखनऊ में गुरुवार देर रात निधन हो गया। वह 82 वर्ष के थे। यह दुखद संयोग है कि उनकी पत्नी, पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी निशा चतुर्वेदी का निधन महज छह दिन पहले, 18 जुलाई को हुआ था। पत्नी के वियोग ने उन्हें भीतर से तोड़ दिया था।
वरिष्ठ साहित्यकार गोपाल चतुर्वेदी का जन्म 15 अगस्त 1942 को लखनऊ में हुआ था। उन्होंने अपने साहित्यिक जीवन की शुरुआत कविता से की, लेकिन उन्हें हिंदी जगत में विशिष्ट पहचान एक व्यंग्यकार के रूप में मिली। हिंदी व्यंग्य साहित्य में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें वर्ष 2015 में ‘यश भारती सम्मान’ प्रदान किया, जबकि केन्द्रीय हिंदी संस्थान द्वारा उन्हें ‘सुब्रमण्यम भारती पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। वर्ष 2001 में उन्हें हिंदी भवन का लोकप्रिय ‘व्यंग्य श्री’ सम्मान भी प्राप्त हुआ था।
वरिष्ठ साहित्यकार और जाने-माने व्यंग्यकार गोपाल चतुर्वेदी ने गद्य और पद्य दोनों विधाओं में उल्लेखनीय लेखन किया। गोपाल चतुर्वेदी के चर्चित कविता संग्रहों में ‘कुछ तो हो’ और ‘धूप की तलाश’ शामिल हैं। वहीं, उनके व्यंग्य संग्रहों में ‘धाँधलेश्वर’, ‘अफ़सर की मौत’, ‘दुम की वापसी’, ‘राम झरोखे बैठ के’, ‘फ़ाइल पढ़ी’, ‘आदमी और गिद्ध’, ‘कुरसीपुर का कबीर’, ‘फार्म हाउस के लोग’ और ‘सत्तापुर के नकटे’ जैसे शीर्षक आज भी पाठकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। उनकी रचनाओं में व्यवस्था पर करारा व्यंग्य, सामाजिक विडंबनाओं की तीखी झलक और मानवीय संवेदनाओं की गहराई देखने को मिलती है।