नई दिल्ली (राघव): दुबई कमाने गए भारत के 59 लोग फंस गए हैं। इसमें से 24 यूपी के रहने वाले हैं, जो वहां की जेल में बंद हैं। महराजगंज के एक युवक के पिता ने दुबई के अधिवक्ता से संपर्क कर रुपये भी भेज दिए फिर भी बेटा नहीं छूटा तब प्रशासन से गुहार लगाई। अब पिता ने सामाजिक कार्यकर्ता राजेश मणि त्रिपाठी के माध्यम से दूतावास को मेल के जरिए सूचना दी है। वहां से जवाब भी आया है। दूतावास के अफसरों ने मामले में हस्तक्षेप करने का आश्वासन दिया है।
महराजगंज जिले के शास्त्री नगर वार्ड नंबर 19 विश्वनाथ गुप्ता ने प्रार्थना पत्र दिया है। उन्होंने बताया कि उनके इकलौते पुत्र दिनेश कुमार गुप्ता की दो वर्ष पहले दुबई स्थित प्राइवेट कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर की नौकरी लग गई थी। बेटे का काम ठीक चल रहा था, लेकिन इसी बीच टेलीकाम कंपनी के जरिए उसे प्राइवेट जॉब का अवसर मिल गया। इससे वह जुड़ गया। उस कंपनी से भारत के अलावा अन्य देश के लोग भी जुड़े थे। एक दिन अचानक पता चला कि वह कंपनी फ्राड है और फिर वहां की पुलिस ने छह जुलाई 2024 को सभी को जेल में बंद कर दिया। वहां पर न तो सुनवाई हो पा रही है और न ही कोई पैरवीकार है।
बेटे को छुड़ाने के लिए पहले पिता ने कंपनी के मालिक से संपर्क किया, जिसमें बेटा गया था, उसने पांच लाख रुपये ले लिया। रुपये लेने के कुछ दिन बाद ही उनकी मौत हो गई और उनका भाई कंपनी का काम देखने लगा। उनसे संपर्क करने पर उसने रकम देने से इनकार कर दिया। फिर एक अधिवक्ता से संपर्क किया गया, जो अब तक तीन लाख रुपये ले चुका है, लेकिन जेल से जमानत नहीं करा पाया है।
इसी केस में बंद हुए नेपाल के काठमाडू निवासी युवक ने वहां फंसे भारतीयों के बारे में बताया था। उसकी मदद से ही दिनेश के परिवार को मामले की जानकारी हो पाई। उसी ने बताया था कि दिनेश को दो मामलों में जमानत मिल गई थी लेकिन तीसरे में फंस गया है। भाई ने बताया कि वह पूरी तरह से जालसाजी का शिकार हो गया है। अब सरकार से ही उम्मीद है।
दिनेश के मौसेरे भाई विजय गुप्ता ने बताया कि कंपनी में काम करने के कुछ महीने बाद ही साथ में काम करने वालों ने ही पार्ट टाइम जॉब के बारे में जानकारी दी थी। फिर दिनेश भी जुड़ा तो कहा गया कि एक खाता खोल लें और उसमें आने वाली रकम को दूसरे खाते में भेज दें। इसके बदले कमीशन मिलेगा। एक महीने काम करने के बाद ही भाई को लग गया कि फ्राड है और उसने काम बंद कर दिया, लेकिन तब तक केस हो गया था और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
सामाजिक कार्यकर्ता राजेश मणि ने बताया कि यूपी के 22 लोगों के फंसने की जानकारी मिल के बाद दूतावास को ईमेल किया गया। वहां से सकारात्मक जवाब भी आया है। इसके पहले भी इस तरह के मामले में आए हैं, जिसमें दूतावास के प्रयास से लोग अपने देश सकुशल लौटे हैं। इस प्रकरण में भी कोशिश की जा रही है कि युवक घर लौट आए।