नई दिल्ली (नेहा): ऑस्ट्रेलिया के जाने-माने लोवी (Lowy) इंस्टीट्यूट ने 2025 के लिए अपना सालाना एशिया पावर इंडेक्स जारी किया है, जिसमें 27 देशों में मिलिट्री, इकोनॉमिक, डिप्लोमैटिक और कल्चरल असर का डिटेल्ड असेसमेंट दिया गया है। रिपोर्ट में रीजनल पावर में बड़े बदलाव को हाईलाइट किया गया है, जिसमें चीन अब एशिया की बड़ी ताकत के तौर पर उभर रहा है, इंडिया लगातार आगे बढ़ रहा है और यूनाइटेड स्टेट्स का असर पिछले सालों के मुकाबले कम हुआ है। जापान ने भी अपनी स्थिति में सुधार किया है, जो इस रीजन में बढ़ती कैपेबिलिटी को दिखाता है
2019 के बाद पहली बार रूस ने एशिया में अपनी स्थिति मजबूत की है और यूक्रेन युद्ध के बाद लगे प्रतिबंधों के कारण खोया हुआ प्रभाव वापस पा लिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया में रूस की मौजूदगी बढ़ रही है। दरअसल, रूस मजबूती के साथ G7 सहयोगियों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के खिलाफ लड़ रहा है। एनालिस्ट इस इलाके में मॉस्को की वापसी का क्रेडिट काफी हद तक चीन और नॉर्थ कोरिया के साथ उसकी स्ट्रेटेजिक डिफेंस और इकोनॉमिक पार्टनरशिप को देते हैं। कुल मिलाकर, रूस एशिया में पांचवीं सबसे असरदार ताकत है, जिसने 2024 में ऑस्ट्रेलिया से खोया हुआ नंबर वापस पा लिया है।
यह रिपोर्ट आठ थीमैटिक एरिया के आधार पर देशों को रैंक करती है, जिसमें मिलिट्री कैपेसिटी, डिफेंस नेटवर्क, इकोनॉमिक ताकत, डिप्लोमैटिक असर, कल्चरल पहुंच, रेजिलिएंस और फ्यूचर रिसोर्स पोटेंशियल शामिल हैं। टॉप दस देश हैं:
यूनाइटेड स्टेट्स – 80.5 (सुपर पावर)
चीन – 73.7 (सुपर पावर)
इंडिया – 40.0 (मेजर पावर)
जापान – 38.8 (मिडिल पावर)
रूस – 32.1 (मिडिल पावर)
ऑस्ट्रेलिया – 31.8 (मिडिल पावर)
साउथ कोरिया – 31.5 (मिडिल पावर)
सिंगापुर – 26.8 (मिडिल पावर)
इंडोनेशिया – 22.5 (मिडिल पावर)
मलेशिया – 20.6 (मिडिल पावर)


