नई दिल्ली (पायल): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (30 नवंबर) को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में देशवासियों को संबोधित करते हुए नवंबर महीने की कई महत्वपूर्ण घटनाओं और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह महीना भारत के लिए ऐतिहासिक, प्रेरणादायक और उपलब्धियों से भरा रहा।
पीएम मोदी ने बताया कि 26 नवंबर को संविधान दिवस के अवसर पर संसद के सेंट्रल हॉल में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस आयोजन ने देश को एक बार फिर लोकतांत्रिक मूल्यों, अधिकारों और कर्तव्यों की याद दिलाई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस महीने वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर देशभर में भव्य कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। उन्होंने बताया कि यह अवसर भारत की सांस्कृतिक धरोहर और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करता है।
मोदी ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर परिसर में धर्मध्वजा का आरोहण एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इसके साथ ही कुरुक्षेत्र के ज्योतिसर में पंचजन्य स्मारक का लोकार्पण भी एक ऐतिहासिक क्षण रहा, जो देश की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को सम्मान देता है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि हैदराबाद में दुनिया की सबसे बड़ी LEAP इंजन MRO सुविधा की शुरुआत की गई है। यह केंद्र भारत को वैश्विक एविएशन उद्योग में नई पहचान देगा और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ाएगा।
उन्होंने कहा कि मुंबई में INS ‘माहे’ को भारतीय नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया। इसके स्वदेशी डिजाइन की खूब चर्चा हुई है। ‘माहे’ नाम पुडुचेरी के ऐतिहासिक क्षेत्र माहे से प्रेरित है, जिसकी सांस्कृतिक विरासत बेहद समृद्ध है। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस युद्धपोत का crest उरुमी और कलारिपयट्टू की पारंपरिक लचीली तलवार की आकृति से मेल खाता है, जो दक्षिण भारत की वीर परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि नौसेना तेज़ी से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही है।
स्पेस सेक्टर पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष इकोसिस्टम तेज़ी से मजबूत हो रहा है। निजी कंपनी Skyroot के ‘Infinity Campus’ ने देश की नवाचार क्षमता और नई सोच को दुनिया के सामने रखा है। उन्होंने इसे भारत के युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा का प्रमाण बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने इस वर्ष 357 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन कर एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में खाद्यान्न उत्पादन में 100 मिलियन टन की वृद्धि हुई है, जो किसानों की मेहनत और कृषि सुधारों की सफलता का परिणाम है।
यह संबोधन प्रधानमंत्री ने देश की प्रगति, तकनीकी उपलब्धियों, सांस्कृतिक गौरव और आत्मनिर्भरता की दिशा में हो रहे प्रयासों को रेखांकित करते हुए दिया।


