नई दिल्ली (नेहा): वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए भारत इजरायल के साथ बड़ा रक्षा समझौता करने जा रहा है। भारत वायु सेना के लिए उन्नत मिसाइलों, सटीक निर्देशित बमों और अन्य प्रणालियों के लिए लगभग 78,217 करोड़ रुपये के समझौते पर हस्ताक्षर करने की तैयारी कर रहा है। कहा जा रहा है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। भारत SPICE-1000 सटीक निर्देशित बम, हवा से सतह पर वार करने वाली रैम्पेज मिसाइलें, एयर लोरा वायु-प्रवेशित बैलिस्टिक मिसाइलें और आइस ब्रेकर मिसाइल प्रणाली के साथ-साथ हवा से हवा में वार करने वाली मिसाइलें, लोइटरिंग मुनिशन्स, आधुनिक रडार, सिमुलेटर और नेटवर्क-केंद्रित कमांड सिस्टम इजरायल से खरीदने जा रहा है। इनके शामिल होने के बाद सुखोई 30MKI और मिग-29K जैसे लड़ाकू विमानों की मारक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
भारतीय वायु सेना और नौसेना के पास पहले से इजरायली रैम्पेज मिसाइलें हैं। इन्हें सुखोई 30MKI, मिग-29 और जगुआर जैसे लड़ाकू विमानों से लॉन्च किया जा सकता है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इन मिसाइलों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया था। 570 किलोग्राम वजनी ये मिसाइल GPS से निर्देशित होती है और एंटी-जैमरिंग सुविधाओं से लैस है। यह हवाई अड्डों, बंकरों और रसद केंद्रों को दूर से ही तबाह करने में सक्षम है।
करीब 5 मीटर लंबी और 1,600 किलो वजनी लोरा मिसाइल आवाज की गति से 5 गुना ज्यादा तेज रफ्तार से लक्ष्य को भेद सकती है। ये करीब 430 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य पर हमला कर सकती है। इसे खासतौर पर दुश्मन के मिसाइल ठिकानों, वायु रक्षा प्रतिष्ठानों और रणनीतिक अड्डों को नष्ट करने के लिए बनाया गया है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और इजरायली साझेदारों के सहयोग से भारत में इस मिसाइल का उत्पादन पहले ही किया जा रहा है।
आइस ब्रेकर मिसाइल को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के लिहाज से बनाया गया है। यह कम ऊंचाई पर उड़ते हुए दुश्मन के रडार को चकमा देने में सक्षम है।इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम, ऑटोमैटिक टारगेट रिकग्निशन और GPS के बिना काम करने वाले आधुनिक सेंसर लगे हैं। ये पैसिव सीकर, सी-स्किमिंग फ्लाइट प्रोफाइल और लो ऑब्जर्वेबल नेचर की वजह से रडार की पकड़ में नहीं आती है। ये लोकेशन बदलते लक्ष्य को भी निशाना बना सकती है।

