वॉशिंगटन (नेहा): अमेरिका गुरुवार 22 जनवरी को आधिकारिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से अलग हो गया है। अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग ने कहा है कि अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ से अपना नाम वापस लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली है, जिससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का लंबे समय से चला आ रहा लक्ष्य पूरा हो गया है। ट्रंप ने एक साल पहले अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करने के पहले दिन ही एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए अमेरिका के इस संगठन से बाहर निकलने के लिए नोटिस दिया था। इसके साथ ही अमेरिका ने संगठन का बकाया चुकाने से भी इनकार कर दिया है।
अमेरिकी कानून के मुताबिक, अमेरिका को विश्व स्वास्थ्य संगठन को छोड़ने से एक साल पहले नोटिस देना होता है और सभी बकाया फीस चुकानी होती है। अमेरिका पर वर्तमान में डब्ल्यूएचओ का लगभग 260 मिलियन डॉलर (करीब 2380 करोड़ रुपये) का बकाया है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस पैसे के चुकाने की संभावना कम है और विश्व स्वास्थ्य संगठन के पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका के संगठन से बाहर निकलने से दुनिया भर में पब्लिक हेल्थ को नुकसान होगा।
गुरुवार को अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग ने कहा कि WHO में तैनात सभी अमेरिकी सरकारी फंडिंग खत्म कर दी गई है और संगठन में तैनात सभी कर्मचारियों और कॉन्ट्रैक्टरों को वापस बुला लिया गया है। इसने यह भी कहा कि अमेरिका ने WHO की स्पॉन्सर कमेटियों, लीडरशिप बॉडी, गवर्नेंस ढांचे और तकनीकी वर्किंग ग्रुप में आधिकारिक भागीदारी बंद कर दी है। एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, ‘हमारा ऑब्जर्वर के तौर पर हिस्सा लेने का कोई प्लान नहीं है और न ही दोबारा शामिल होने की योजना है।’


