काबुल (नेहा): अफगानिस्तान के सुरक्षाबलों ने कथित तौर पर मैदन वर्दक प्रांत में एक ड्रोन एयरक्राफ्ट को मार गिराया है। अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान समर्थकों ने इसे अमेरिका का MQ-9 रीपर ड्रोन बताया है। इसके पकिस्तान से लॉन्च किए जाने की संभावना है। गुरुवार (1 जनवरी) की सुबह अफगानिस्तान के पहाड़ी इलाकों में यह गिरा है। तालिबान समर्थक सोशल मीडिया यूजर्स ने क्रैश हुए अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन की तस्वीरें और वीडियो भी शेयर किए हैं। हालांकि ड्रोन के गिरने के बारे में आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं, कुछ लोग इसके पाकिस्तानी ड्रोन होने की बात कह रहे हैं।
अफगानिस्तान में गिरे इस रीपर ड्रोन के बारे में कहा जा रहा है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने इसे गुपचुप तरीके से इस्तेमाल किए जा रहे पाकिस्तानी एयरबेस से लॉन्च किया गया था। पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर अमेरिकी एजेंसियों की मौजूदगी से इनकार करता रहा है। इसके जैकोबाबाद या शम्सी जैसे अमेरिकी इस्तेमाल वाले पाकिस्तानी ठिकानों से लॉन्च किए जाने की संभावना है। ऐसे में इससे पाकिस्तान की भी पोल खुलती है।
अफगानिस्तान में यह ड्रोन गिरना अमेरिका के लिए झटका है। बीते साल यमन के हूतियों ने दावा किया था कि उन्होंने अक्टूबर, 2023 से 22 रीपर ड्रोन मार गिराए हैं। यमन के बाद अफगानिस्तान में गिरने से अमेरिका के इस ताकतवर हथियार पर कई सवाल खड़े हो जाते हैं। अमेरिका के इस ड्रोन को बेहद सटीक माना जाता है।
अमेरिका के इस ड्रोन की मारक क्षमता बेहद सटीक है। MQ-9 रीपर में 8 हेलफायर मिसाइल और 1700 किलो तक बम ले जाने की क्षमता है। इससे यह दुश्मन के टैंकों, ठिकानों और सैनिकों को तबाह कर सकता है। ये 50 हजार फीट की ऊंचाई से दुश्मन का पता लगा लेता है। भारत ने भी अमेरिका से इन ड्रोन पर डील की है।
भारत का अमेरिकी कंपनी जनरल एटॉमिक्स के साथ समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत भारत को 31 MQ-9B ड्रोन मिलेंगे। ये ड्रोन हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्यूरेंस (HALE) क्षमता वाले हैं। भारत को MQ-9B ड्रोन साल 2029 से मिलना शुरू होंगे। साल 2030 तक सारे 31 ड्रोन भारत को मिल जाएंगे।


