नई दिल्ली (पायल): भारत अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। ISRO ने इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है। ISRO ने शुरुआती मॉडल और आवश्यक तकनीकी तैयारी पर काम किया है। स्टेशन का पहला मॉड्यूल 2028 में स्पेस में भेजा जा सकता है। इसके पूरा होने का लक्ष्य 2035 है। सरकार ने इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट के लिए कंपनियों से प्रस्ताव मांगे हैं।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। 24 जनवरी 2026 की ताजा जानकारी के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है।
परियोजना से जुड़े मुख्य विवरण निम्नलिखित हैं
निजी क्षेत्र को आमंत्रण: इसरो के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) ने 21 जनवरी 2026 को भारतीय कंपनियों से ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (EoI) आमंत्रित किया है। इसके तहत घरेलू कंपनियों को स्टेशन के पहले मॉड्यूल, BAS-01, के दो स्ट्रक्चरल यूनिट्स के निर्माण के लिए आवेदन करने को कहा गया है।
समय सीमा
2028: पहले मॉड्यूल (BAS-01) को लॉन्च करने का लक्ष्य है।
2035: पांच मॉड्यूल वाले पूरे अंतरिक्ष स्टेशन को पूरी तरह से चालू (Operational) करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रोजेक्ट का बजट और स्वरूप
सरकार ने गगनयान कार्यक्रम के विस्तार के रूप में इस परियोजना के लिए अतिरिक्त ₹11,170 करोड़ की मंजूरी दी है, जिससे कुल बजट बढ़कर ₹20,193 करोड़ हो गया है। यह स्टेशन पृथ्वी से लगभग 400-450 किमी की ऊँचाई पर स्थित होगा और इसमें 3-4 अंतरिक्ष यात्रियों के रहने की क्षमता होगी।
महत्व
यह भारत का पहला स्वदेशी ‘ऑर्बिटल लेबोरेटरी’ होगा, जहाँ सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (microgravity) में वैज्ञानिक अनुसंधान और भविष्य के गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए तकनीकों का परीक्षण किया जाएगा। इच्छुक भारतीय कंपनियों को अपनी रुचि व्यक्त करने के लिए 8 मार्च 2026 तक का समय दिया गया है। अधिक जानकारी के लिए इसरो की आधिकारिक वेबसाइट ISRO.gov.in देखी जा सकती है।


