नई दिल्ली (नेहा): ड्रग्स के मामले में पहले से ही बदनाम पंजाब की जेलों से अब एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। यहां कैदी ड्रग्स की कमी के चलते छिपकली की पूंछ को ही अपना नया ‘नशा’ बना बैठे हैं। जी हां, छिपकली पकड़ो, पूंछ काटो, सुखाकर पाउडर बनाओ और तंबाकू या बीड़ी में मिलाकर कश लगा लो। बस, ‘इंस्टेंट नशा’ मिल जाता है!
इस अजीबोगरीब ट्रेंड की भनक लगते ही जेल प्रशासन हड़बड़ा गया है। अब जेल की दीवारों से एक-एक छिपकली हटा ली गई है, ताकि कैदी इस ‘जैविक ड्रग’ का शिकार ना बनें। ये खबर सोशल मीडिया पर तहलका मचाए हुए है। कई पोस्ट्स में दावा किया गया है कि पंजाब की जेलों में कैदी इसी तरह नशा कर रहे हैं। लेकिन क्या ये सिर्फ अफवाह है? नहीं, मेडिकल और क्रिमिनोलॉजी के केस स्टडीज इसे साबित करती है।
जेलों में ड्रग्स स्मगलिंग रोकने के सख्त इंतजामों के बावजूद, कैदी कभी-कभी नशे के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाश लेते हैं। पंजाब की जेलों में 42% कैदी ड्रग एडिक्ट्स हैं। ये आंकड़ा 2023 के एक सरकारी सर्वे से आया है। जब चरस, हेरोइन या स्पिरिट जैसी चीजें ना मिलें, तो कैदी जेल के आसपास मिलने वाली छिपकली (खासकर इंडियन स्पाइनी-टेल्ड लिजर्ड या वॉल लिजर्ड) को टारगेट बनाते हैं। एक 25 साल के कैदी का केस सबसे चर्चित है, जो 2014 में पंजाब के पटियाला के राजिंदरा हॉस्पिटल में एडमिट हुआ था। ये कैदी 15 साल से कैनबिस का आदी था. जेल में ड्रग्स ना मिलने पर साथी कैदियों ने उसे छिपकली का ‘ट्रिक’ सिखाया। वो छिपकली को पकड़कर जला देते, उसकी राख को बीड़ी में भरकर सुलगाते थे। कैदी का दावा था कि ये कैनबिस जितना ही मजा देता है, और तुरंत ही नशा छा जाता है।


