ईटानगर (नेहा): महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों की तरह ही बीजेपी ने अरुणाचल प्रदेश में जबरदस्त जीत हासिल की है। बीजेपी ने लोकल बॉडी चुनावों में जीत दर्ज करके जहां जिला लेवल पर अपना दबदबा मजबूत कर लिया है तो वहीं इन चुनावों में कांग्रेस कांग्रेस इम्प्रेस नहीं कर पाई। चुनाव आयोग के अनुसार जिला परिषद सेगमेंट में बीजेपी ने 245 में से 170 सीटें जीतीं हैं। इसमें 59 बिना किसी मुकाबले के सीटें शामिल हैं। बीजेपी ने ईटानगर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनावों में 20 में से 14 वार्ड भी जीते हैं। बीजेपी की बड़ी जीत पर अरुणाचल प्रदेश के सीएम पेमा खांडू की प्रतिक्रिया भी सामने आई हैं। उन्होंने कहा है कि अरुणाचल प्रदेश के लोगों का विकास की राजनीति को चुना है। लोगों ने हमारे प्यारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की लीडरशिप और उनके सबको साथ लेकर चलने वाले सोच को स्वीकार किया है। मैं पूरे दिल से भरोसे और विश्वास के लिए मैं उनका शुक्रिया अदा करता हूं। खांडू ने कहा है कि आपका भारी जनादेश और सपोर्ट हमें विकसित अरुणाचल बनाने के लिए नई एनर्जी और जोश से भर देता है।
अरुणाचल प्रदेश में पंचायत और म्युनिसिपल बॉडी चुनावों के लिए वोटों की गिनती शनिवार को हुई थी। एसईसी के एक बयान के अनुसार, जिला परिषद सेगमेंट में बीजेपी ने जिला परिषद सदस्य (जेडपीएम) की 245 सीटों में से 170 पर जीत हासिल की, जिसमें 59 निर्विरोध सीटें शामिल हैं, जिससे जिला स्तर पर उसका स्पष्ट प्रभुत्व स्थापित हुआ। नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने पांच सीटें जीतीं, जिनमें एक निर्विरोध शामिल है, और 23 निर्वाचन क्षेत्र निर्दलीय और अन्य उम्मीदवारों ने जीते। ग्राम पंचायत चुनावों में भी इसी तरह का रुझान दिखाई दिया। बीजेपी ने 8,208 सीटों में से 6,085 सीटें जीतीं। जिनमें 5,211 निर्विरोध जीत शामिल हैं।
चुनावों में पीपीए उम्मीदवारों ने 648 सीटें जीतीं। जिनमें 386 निर्विरोध शामिल हैं, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने 627 सीटें हासिल कीं। इनमें से 280 निर्विरोध जीत वाली सीटें शामिल हैं। NCP को 396 सीटें मिलीं है। इनमें से 159 पर कोई मुकाबले वाली सीटें हैं। NPP को 160 सीटें मिलीं, जिनमें से 81 पर कोई मुकाबला नहीं हुआ। लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) को 27 सीटें मिलीं, जिनमें से 16 पर कोई मुकाबला नहीं हुआ, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) को एक सीट मिली। चुनाव आयोग के अनुसार 47 ग्राम पंचायत सीटों पर नतीजे ड्रॉ के जरिए तय किए गए। यहां उम्मीदवारों को बराबर वोट मिले थे जबकि 45 सीटें नॉमिनेशन न होने, कैंडिडेट का नाम खारिज होने या चुनाव रद्द होने जैसे कारणों से खाली रहीं।


