नई दिल्ली (नेहा): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिवार पर की गई अमर्यादित टिप्पणी के खिलाफ दिल्ली बीजेपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस मुख्यालय से कुछ दूरी पर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही कांग्रेस दफ्तर तक विरोध मार्च निकाला। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने विरोध मार्च को कांग्रेस दफ्तर पर पहुंचने से पहले ही खत्म करा दिया। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा के नेतृत्व में पुलिस बैरिकेड्स तोड़ कर कांग्रेस मुख्यालय के पास पार्टी कार्यकर्ता पहुंच गए थे, जिसके बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल करके भीड़ तितर-बितर किया।
प्रदर्शन से वीरेंद्र सचदेवा, बीजेपी सांसद योगेंद्र चांदोलिया और कैलाश गहलोत समेत तमाम बीजेपी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया और आई.पी. एस्टेट थाने ले गई. प्रदर्शन खत्म कराने के लिए पुलिस की ओर से किए गए वाटर कैनन चार्ज में बीजेपी के शाहदरा जिला अध्यक्ष दीपक गाबा भी चोटिल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। विरोध मार्च निकलने से पहले सचदेवा ने मंच से कहा कि आजादी के बाद पहली बार देश के प्रधानमंत्री पद पर एक गरीब का बेटा, एक वंचित वर्ग का बेटा, पिछले 11 सालों से बिना थके, बिना डरे, दिन-रात देश के लिए काम कर रहा है, जो कांग्रेसियों को बर्दाश्त नहीं हो रहा है।
सचदेवा ने मंच से कहा कि जिस परिवार में चांदी के चम्मच के साथ राहुल गांधी पैदा हुए, जो परिवार देश के पैसों से हवाई जहाज में जन्मदिन मनाता था, उसे कैसे बर्दाश्त होगा कि एक गरीब मां का बेटा दुनियां में भारत का डंका बजा रहा है। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए और उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने शिशुपाल का रोल अदा किया है और आज कांग्रेस पार्टी मानसिक कुंठा में है। राहुल गांधी के नेतृत्व में 18 चुनाव हार चुकी कांग्रेस अब एक और हार की तैयारी कर चुकी है।
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम ने कहा कि जिस प्रधानमंत्री ने देश के कई ऐतिहासिक काम किए और विश्व में उनके नाम का लगातार गुणगान होना, कांग्रेस को बर्दाश्त नहीं हो रहा है। बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन में राहुल गांधी के 4 पुतलों को भी लेकर आए थे। प्रदर्शन में आए कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए, बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष ना तो भाषा की मर्यादा सदन में रखते हैं और ना ही सदन के बाहर। ना व्यवहार की मर्यादा सदन में रखते हैं और ना ही सदन के बाहर। ऐसा लगता है कि जैसे भाषा की अभ्रदता कांग्रेस पार्टी की शैली बन गई है।