नई दिल्ली (नेहा): सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला में वसंत पंचमी पर सूर्योदय के साथ ही मां वाग्देवी का पूजन शुरू हो गया है। सुबह वेदारंभ संस्कार के साथ की इसकी शुरुआत हो गई है। वहीं दोपहर में परिसर में एक बजे से तीन बजे तक मुस्लिम समाज के लोग नमाज अदा करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में यह स्पष्ट है कि दोनों समुदाय के आयोजन पृथक-पृथक स्थान पर होंगे। पूजा-अर्चना निर्विघ्न होगी। मुस्लिम समाज को अलग स्थान दिया गया है। ऐसे स्थान की तलाश में प्रशासन ने स्वयं सर्वे किया है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से भी नक्शा लिया है। दोनों पक्षों की बैठक बुलाई गई। हिंदू समाज संतुष्ट है। मुस्लिम समाज से भी चर्चा हुई है। उन्हें विकल्प दिए गए हैं। यदि यह पक्ष राजी नहीं होता है तो प्रशासन फैसला लेगा। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने स्पष्ट किया कि हिंदू समाज पूर्व परंपरा के अनुसार पूजन करेगा।
कलेक्टर के अनुसार, कोर्ट का कहना है कि प्रवेश-निकासी अलग होनी चाहिए। परिसर में और भी जगह है। जिला प्रशासन कानून व्यवस्था को देखते हुए स्वयं से स्थान तय कर सकता है। यदि यह स्थान सहमति के आधार पर बनता है, तो ठीक है। यदि सहमति नहीं बनती है तो स्थानीय प्रशासन स्थान तय कर सकता है। वहीं, इससे पहले भोजशाला मुक्ति यज्ञ के पदाधिकारियों की ओर से कहा गया कि सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा शांतिपूर्ण और निर्विघ्न रूप से संपन्न होगी।
सुबह साढ़े 10 बजे शहर के लालबाग से भोजशाला तक शोभायात्रा निकाली जाएगी। दोपहर सवा 12 बजे धर्मसभा होगी। इसमें प्रमुख वक्ता के रूप में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार और सनातनी अखाड़ा के संयोजक स्वामी स्वदेशानंद गिरी महाराज शामिल रहेंगे। दोपहर एक बजकर 15 मिनट पर महाआरती होगी।


