अलवर (नेहा): भपंग कला को संरक्षित करने एवं देश- विदेशों तक पहुंचाने के लिए अलवर के भपंग वादक गफरुद्दीन मेवाती जोगी को पद्मश्री अवार्ड से नवाजा जाएगा। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित पद्म अवार्ड में गफरुद्दीन मेवाती जोगी को पद्मश्री अवार्ड दिए जाने की घोषणा की गई। रविवार शाम को पद्मश्री मिलने की सूचना मिलते ही उनके परिवार ही नहीं, मोहल्ला एवं अलवर जिला सहित कला प्रेमियों में खुशी का ठिकाना नहीं रहा। तीन साल की आयु से भपंग बजा रहे गफरुद्दीन मेवाती को 68 वर्ष की उम्र में पद्मश्री अवार्ड मिलने पर कहा कि देर ही सही उनकी उपासना को फल मिला। खास बात यह कि मेवात से जुड़े गफरुद्दीन महाभारत, रामायण व लोक कथाओं पर भपंग वादन के साथ बखूबी गाते रहे हैं। इंग्लैंड की महारानी रही एलिजाबेथ के जन्म दिन पर भी वे अपनी भपंग कला के रंग बिखेर चुके हैं। वे अब तक करीब 48 देशों में भपंग बजा चुके हैं।
भपंग वादक गफरुद्दीन मेवाती जोगी ने ईटीवी भारत से खास बातचीत में बताया कि पद्मश्री मिलने की सूचना मिलना उनके जीवन का ऐतिहासिक पल है। रविवार शाम को जब भारत सरकार की ओर से फोन आया कि उन्हें पद्मश्री से नवाजा जाएगा, तो यह खबर पूरे परिवार और क्षेत्र में खुशी की लहर बनकर फैल गई। उन्होंने बताया कि वे भरतपुर जिले के कैथवाड़ा गांव से करीब 40 साल पहले अलवर शहर की टाइगर कॉलोनी में आए। वे तीन साल की उम्र से ही वे अपने पिता बुद्धसिंह के साथ भपंग वादन सीखने लगे और सात साल की उम्र में उन्होंने भपंग बजाना सीख लिया। यह कला उन्हें अपने पिता से विरासत में मिली। उन्होंने बताया कि पिता के सान्निध्य में रहकर वाद्य भपंग की बारीकियों को समझा और इसे अपनी पहचान बना लिया।


