जेद्दा (नेहा): इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) ने एक बार फिर कश्मीर राग अलापा है। उसने एक लंबा-चौड़ा बयान जारी किया है, जिसमें कश्मीर को लेकर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों को लागू करने की बात कही गई है। इतना ही नहीं, ओआईसी ने जम्मू और कश्मीर के लोगों के प्रति अपनी एकजुटता भी प्रकट की है। यह पहला मौका नहीं है, जब ओआईसी ने भारत विरोधी बयान जारी किया है। हालांकि, भारत ने हर बार ओआईसी को उसकी हद याद दिलाई है और उसके बयानों की कड़ी निंदा भी की है।
ओआईसी ने 8 जनवरी को एक्स पर एक चिट्ठी पोस्ट की। इसमें लिखा है, “5 जनवरी 1949 के भारत और पाकिस्तान प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र आयोग की सालगिरह पर OIC के जनरल सेक्रेटेरिएट का बयान”। इस पत्र में आगे लिखा है, ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन के जनरल सेक्रेटेरिएट ने 5 जनवरी 1949 को भारत और पाकिस्तान पर यूनाइटेड नेशंस कमीशन द्वारा अपनाए गए प्रस्ताव को याद किया, जिसमें यूनाइटेड नेशंस की देखरेख में किए गए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष रेफरेंडम के जरिए जम्मू और कश्मीर के लोगों को खुद फैसला लेने के अधिकार की पुष्टि की गई थी।
चिट्ठी में आगे लिखा है, “यह प्रस्ताव, UN सिक्योरिटी काउंसिल के संबंधित प्रस्तावों के साथ मिलकर, जम्मू और कश्मीर विवाद के निपटारे के लिए कानूनी ढांचा बनाता है। इस मौके पर, जनरल सेक्रेटेरिएट जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ अपनी पूरी एकजुटता दिखाता है और जम्मू-कश्मीर के इंटरनेशनल लेवल पर माने गए स्टेटस का सम्मान करने और 5 अगस्त 2019 और उसके बाद उठाए गए सभी एकतरफ़ा कदमों को वापस लेने की अपील करता है, जो इंटरनेशनल कानून और यूनाइटेड नेशंस के ज़रूरी प्रस्तावों के खिलाफ हैं।”

