नई दिल्ली (नेहा): पश्चिम बंगाल में 25 साल बाद निपाह वायरस के संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग और केंद्र सरकार अलर्ट हो गई है। वायरस बेहद खतरनाक है। इसकी मृत्यु दर बहुत ज्यादा बताई जाती है। अभी तक इसका कोई टीका या खास दवा मौजूद नहीं है। हालात पर नजर रखने के लिए केंद्र की एक विशेष टीम बंगाल भेजी गई है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक 11 जनवरी को कोलकाता के पास स्थित एम्स कल्याणी में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। इसके बाद तुरंत जांच और सतर्कता बढ़ा दी गई थी। केंद्र की जो टीम बंगाल पहुंची है, उसमें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी और पर्यावरण मंत्रालय से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हैं। ये सभी मिलकर हालात पर नजर रख रहे हैं। संक्रमण को फैलने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती ने बताया कि दोनों संदिग्ध मरीज नर्स हैं। उसी अस्पताल में काम करती हैं जहां उनका इलाज चल रहा है। सरकार यह जानने की कोशिश कर रही है, आखिर निपाह वायरस की चपेट में कैसे आईं। जानकारी मिली है कि कुछ दिन पहले वे बर्धमान गई थीं इसलिए वहां भी जांच की भी जा रही है।
सरकार ने उन सभी लोगों की पहचान शुरू कर दी है जो हाल के दिनों में इन नर्सों के संपर्क में आए थे। उत्तर 24 परगना, पूर्व बर्धमान और नदिया जिलों में बड़े पैमाने पर जांच और निगरानी की जा रही है। जिन जगहों पर ये नर्सें काम कर चुकी हैं या यात्रा कर चुकी हैं, वहां भी खास नजर रखी जा रही है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने तीन हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं।


