नई दिल्ली (नेहा): दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत नहीं मिली। कोर्ट ने दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि मामले में सभी आरोपियों की भूमिका एक जैसी नहीं है। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि लंबे समय तक जेल में रखना जमानत का आधार नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों आरोपियों पर UAPA के तहत केस चलता रहेगा।
कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम के अलावा अन्य आरोपियों को जमानत दे दी है। इनमें गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद शामिल हैं। बताते चलें कि जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजारिया की बेंच ने सोमवार, 5 जनवरी को उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों की जमानत याचिका पर अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने फैसले में अभियोजन यानी प्रॉसिक्यूशन पक्ष को भी फटकार लगाई और कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के आरोपों से जुड़े मामलों में मुकदमे में देरी को ट्रंप कार्ड नहीं बनाया जा सकता है।
उमर खालिद और शरजील इमाम गवाहों की जांच पूरी होने या अब से एक साल के अंदर वे जमानत के लिए फिर से निचली अदालत में याचिका दायर कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को भी निर्देश दिया कि दोनों के मामले पर इस आदेश का कोई प्रभाव डाले बिना विचार किया जाए। कोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा, हर व्यक्ति के मामले का फैसला उनकी कथित भूमिकाओं के आधार पर अलग-अलग किया गया है। सभी याचिकाकर्ताओं को आरोप सिद्ध होने के मामले में एक जैसा नहीं माना जा सकता।
कुछ आरोपियों का व्यवहार सहायक यानी असिस्ट करने जैसा प्रतीत होता है। सभी आरोपियों की भूमिका निर्धारित की जानी चाहिए। सभी के साथ समान व्यवहार नहीं किया जा सकता। सभी आरोपियों के साथ समान व्यवहार करने से मुकदमे से पहले हिरासत में रखने को बढ़ावा मिलेगा। हमें यह जांच करनी होगी कि क्या लगातार हिरासत से कोई फायदा होता है। हमें दोष सिद्ध करने में सावधानी बरतनी होगी।


