नई दिल्ली (नेहा): इस साल मार्च-अप्रैल में होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा और अन्नाद्रमुक (AIADMK) अपने गठबंधन को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा की कोर कमिटी की महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें पार्टी ने राज्य की करीब 120 सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। सूत्रों के अनुसार, भाजपा का मुख्य फोकस जीतने वाली सीटों पर है। बैठक में कोयंबटूर में दो, कन्याकुमारी में दो, मदुरै में कुछ सीटें और चेन्नई में तीन से चार सीटों पर विशेष ध्यान दिया गया। इन क्षेत्रों में भाजपा अपने मजबूत उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है, जहां पार्टी का आधार पहले से मजबूत है या बढ़ाने की संभावना है।
इसके अलावा रामेश्वरम क्षेत्र की सीटों पर भी भाजपा उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है। ये क्षेत्र दक्षिण तमिलनाडु में महत्वपूर्ण हैं और यहां पार्टी का प्रदर्शन गठबंधन की सफलता के लिए निर्णायक हो सकता है। भाजपा और अन्नाद्रमुक के बीच गठबंधन पहले ही मजबूत हो चुका है,पलानीस्वामी (ईपीएस) के नेतृत्व में एनडीए चुनाव लड़ेगा। हालांकि, सीटों की संख्या की अंतिम घोषणा से पहले पार्टी की कोशिश है कि अन्नाद्रमुक के दोनों अलग धड़े- टीटीवी दिनाकरन और ओ। पन्नीरसेल्वम (ओपीएस) को एनडीए में शामिल किया जाए।
वर्तमान में ये दोनों नेता एनडीए के हिस्सा नहीं हैं, लेकिन भाजपा केंद्रीय नेतृत्व इन धड़ों को साथ लाने के प्रयास में लगा है। सूत्र बताते हैं कि ईपीएस के नेतृत्व में एनडीए के नेता लगातार दिनाकरन और ओपीएस के नेताओं से संपर्क में हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य अन्नाद्रमुक के पारंपरिक वोट बैंक को एकजुट करना है, ताकि डीएमके के खिलाफ मजबूत चुनौती पेश की जा सके। दिनाकरन और ओपीएस का थेवर समुदाय में अच्छा प्रभाव है, जो दक्षिणी जिलों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। यदि ये धड़े एनडीए में शामिल हो जाते हैं, तो गठबंधन की स्थिति और मजबूत हो जाएगी।


